भगवान शिवजी की कृपा से रावण ने रचे थे ये महाग्रंथ, आज तक पढ़े जा रहे हैं

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ब्यूरो: अहंकार और अत्याचार के प्रतिरूप माने गए दशानन रावण की योग्यताएं भी कुछ कम नहीं थीं. परम ज्ञानी और समस्त विद्याओं में पारंगत रावण महाशक्तिशाली और त्रिलोक विजेता था, उसके पराक्रम के आगे देव, दानव और मानव सभी कांपते थे. लंका में रहते हुए भी उसने इंद्रलोक, कैलाश पर्वत और भूलोक के किसी भी हिस्से को पराक्रम से अछूता नहीं रखा. दुनिया भले ही उसके बुरे कर्मों के चलते उसके अपयश को जानती हो, लेकिन उसी महाज्ञानी के रचे महा ग्रंथ आज भी चिकित्सा, शिक्षा, ज्योतिष और अध्यात्मिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को राह दिखाती हैं. कहा जाता है शिवजी की कृपा रावण ने करीब 13 ग्रंथ लिखे, जिनमें उसने राजनीति, इंद्रजाल पर भी जानकारियों का भंडार दिया.

आइए जानते हैं रावण रचित ग्रंथों में किसनके लिए क्या कुछ लिखा गया है:-

  1. शिव तांडव स्तोत्र : रावण ने आराध्यदेव शिवजी की स्तुति में ‘शिव तांडव स्तोत्र’ रचा था. कहा जाता है कि इसे पढ़ने से व्यक्ति पर भोलेनाथ की विशेष कृपा होती है.
  2. रावण संहिता : रावण संहिता में दशानन के जीवन, ज्योतिष की बेहतर जानकारियों का भंडार है. इसे ज्योतिषशास्त्रियों के लिए अचूक ग्रंथ माना जाता है.
  3. दस शतकात्मक अर्कप्रकाश : यह चिकित्सा और तंत्र क्षेत्र के चर्चित ग्रंथ है, इसके जरिए रावण ने चिकित्सकों के लिए कई विधान और उपाय बताए.
  4. दस पटलात्मक : यह भी चिकित्सा और तंत्र के क्षेत्र का चर्चित ग्रंथ है, जिसका उल्लेख अपेक्षकृत कम मिलता है.
  5. कुमारतंत्र: यह दोनों ही चिकित्सा और तंत्र के क्षेत्र के चर्चित ग्रंथ.
  6. नाड़ी परीक्षा : चिकित्सा क्षेत्र के एक अलग रूप से विस्तारित करता है. इसके अलावा रावण ने अरुण संहिता, अंक प्रकाश, इंद्रजाल, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर और रावणीयम आदि पुस्तकों की रचना की थी.

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