RURAL DEVELOPMENT: बड़े क्षेत्र में पा सकते हो बड़ा मुकाम, इस क्षेत्र में करियर बनाकर करें समाज सेवा और बनाएं जमकर पैसा

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गांव में तलाशें भविष्य

अभय त्रिपाठी

न्यूजएजेंडा24.कॉम करियर ब्यूरो, अभय त्रिपाठी। देश की 70 फीसदी आबादी अभी भी गांवों में रहती है। गांव की हवा और मिट्टी से सबको लगाव रहता है। समय के साथ ही अब लोगों की सोच भी बदल रही है। महंगाई और रोजगार के अभाव में लोग गांव छोड़कर शहर की तरफ नौकरी के लिए आ रहे है। जिस कारण शहरों में भीड़ और बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। गांवों में लगातार युवाओं की घटती तादाद बहुत परेशानी का सबब बनी हुई है। ऐसे में सरकार भी ग्रामीण भारत का चेहरा बदलने के लिए बजट में वृद्धि कर रही है। रोजगार गारंटी और गरीबी उन्मूलन जैसे कई कार्यक्रम चला रही है। सरकार के विभिन्न मंत्रालय भी लगातार ग्रामीण विकास में अपनी भागीदारी बढ़ाते जा रहे हैं। इस कारण इस क्षेत्र में विभिन्न स्तरों पर रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। करियर के रूप में ग्रामीण विकास को इसलिए भी महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि यह एक व्यापक क्षेत्र है तथा इस क्षेत्र में अवसर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित और पेशेवर लोगों की काफी जरूरत है।

ग्रामीण विकास धीरे-धीरे एक पेशे के रूप में तब्दील होता जा रहा है। विभिन्न शैक्षणिक संस्थान भी रूरल डेवलपमेंट में प्रोफेशनल कोर्सेज ऑफर कर रहे हैं, जिसके चलते देश में प्रशिक्षित रूरल डेवलपमेंट प्रोफेशनल्स तैयार हो रहे हैं। इसके साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय की नोडल एजेंसी भी युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए डिप्लोमा कोर्सेज चला रही है।

रूरल डेवलपमेंट के क्षेत्र में कार्य

लोगों को सामाजिक, मानसिक और राजनीतिक स्तर पर जागरूक करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनाने का काम रूरल डेवलपमेंट के अंतर्गत आता है। ग्रामीण लोगों की समस्याओं को समझने और उनको दूर करना, आर्थिक मंदी और महंगाई इत्यादि समस्याओं को समझना व इससे उबरने के उपाय तथा आमजन को आए दिन होने वाली चुनौतियों के बारे में बताना व उनका सामना करने के लिए उन्हें तैयार करना भी इसी क्षेत्र के जुड़े लोग करते हैं। एंटी करप्शन मूवमेंट चलाना,  वुमन हेल्थ पर काम करना,  ग्रामीणों के अधिकार के लिए लड़ना व उनका हक उन्हें दिलवाना,  अर्बन और इंटरनेशनल लोगों के प्रभाव से इनको मुक्ति दिलाना भी रूरल डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों का है।

कैसे चुनें इस क्षेत्र में करियर

रूरल डेवलपमेंट को प्रोफेशनल कोर्स के अंतर्गत माना जाता है। इस क्षेत्र में सबसे अधिक आपकी स्किल्स और रुचियां मायने रखती हैं। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे आप तरक्की करने लगते हैं। आमतौर इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) के दौरान आप तीन फील्ड- टीचिंग, रिसर्च और प्रैक्टिस में से किसी एक क्षेत्र में जा सकते हैं। इसके साथ ही आप दो साल का अनुभव प्राप्त करते-करते पीएचडी के लिए भी एप्लाई कर सकते हैं।

रिसर्च क्षेत्र में आप एमफिल करके जा सकते हैं या फिर एमएसडब्ल्यू करके आप सरकारी और गैरसरकारी संस्थानों पर रिसर्च कर सकते हैं। इसमें आप रूरल डेवलपमेंट में किए जाने वाले विकास के क्षेत्रों जैसे हेल्थ, कम्युनिटी वर्क, एचआईवी एड्स, ह्यूमन रिलेशंस डेवलपमेंट (एचआरडी) इत्यादि में काम कर सकते हैं। रिसर्चर के तौर पर आप एसोसिएट रिसर्चर या फिर रिसर्च डिजाइनर या किसी संस्थान के प्रोजेक्ट में पार्टीसिपेट करके काम कर सकते हैं। प्रैक्टिस के दौरान आप ग्रामीण लोगों के साथ मेलजोल कर अपना काम कर सकते हैं या फिर आप पॉलिसी प्रैक्टिस में ग्रामीणों के लिए बनाई गई पॉलिसीज में कमियां,  खूबियां,  सोशल एक्टिविज्म,  आरटीआई  इत्यादि में ग्रामीण लोगों को जागरूक कर, उनको दी जा रही सुविधाओं को बताने जैसे काम कर सकते हैं। आने वाली आपदाओं से ग्रामीण लोगों को उबारने का काम भी इसी सेक्टर के अंतर्गत आता है।

संभावनाएं-

इस क्षेत्र में प्रशिक्षण लेने के बाद आप सरकारी विभाग, बैंक, समाज कल्याण संस्थान, कॉर्पोरेट सेक्टर, एनजीओ में बहुत अवसर हैं। इसके साथ ही आप अपना खुद का संस्थान बी चला सकते हैं। इन क्षेत्रों में आप टीचर, ट्रेनर, रिर्सचर, कंसल्टेंट, और परियोजना समन्वयक के तौर पर काम कर सकते हैं। अपनी योग्यता के हिसाब से आप राज्य सरकार की ग्रामीण विकास मंत्रालय में भी नौकरी पा सकते हैं।

उपलब्ध कोर्स-

ग्रामीण विकास में भविष्य बानाने के लिए एनआईआरडी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलेपमेंट) और सभी राज्यों में एसआईआरडी (स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलेपमेंट) 1 साल का पीजी डिप्लोमा कोर्स चलाती है। इसके साथ ही कुछ संस्थान इसमें बैचलर डिग्री के कोर्स भी ऑफर करते हैं। इन कोर्सेज में प्रशिक्षण लेने के लिए आपको प्रवेश परीक्षा के रास्ते से गुजरना पड़ेगा।

योगयता-

डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन लेने के लिए ग्रेजुएट होना चाहिए। अगर आप लास्ट ईयर में अपीयर्ड हैं तब भी आप इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। बैचलर कोर्स करने के लिए आपको 12 वीं पास होना चाहिए इसके बाद आप बीएसडब्लयू कोर्स में आपना दाखिला करा सकते हैं।

फीस-

डिप्लोमा कोर्स की फीस एनआईआरडी में 2 लाख रुपये हैं जिसे आप तीन किस्तों में दे सकते हैं। बैचलर कोर्स की फीस अलग-अलग संस्थानों में 80 हजार से 1 लाख रुपये तक है।

वेतन-

रूरल डेवलपमेंट क्षेत्र में आपकी सेलरी आपके अनुभव और काम करने की क्षमता पर तय होती हैं। कि आप किस संस्थान के साथ काम करने जा रहे हैं। इसके अलावा आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स भी आपका करियर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि आप सीधे तौर पर कम्युनिटी के लिए काम कर रहे हैं तो कैम्पस प्लेसमेंट में 30 से 35  हजार रुपये और अनुभव होने पर आप 60-65  हजार रुपये तक कमा सकते हैं।

संस्थान-

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलेपमेंट, हैदराबाद- www.nird.org.in

इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट, आनंद, गुजरात- www.irma.ac.in

जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस, रांची, झारखंड- www.xiss.ac.in

गांधीग्राम रूरल इंस्टिट्यूट, गांधीग्राम, तमिलनाडु- www.ruraluniv.ac.in

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली- www.ignou.ac.in

करियर इंस्टीट्यूट फार रूरल डेवलेपमेंट, भोपाल- www.ciim.ac.in


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