WORLD WAR 3 LIVE: यूक्रेन के विध्वंसक हालात को देख किसी भी आम व्यक्ति की यही सलाह होगी, डॉक्टर राजेश चौहान का ये लेख जरुर पढ़िए

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यूक्रेन के विध्वंसक हालात को देख किसी भी आम व्यक्ति की यही सलाह होगी,

‘आग लगी इस वृक्ष को जलने लगे हैं पात,

उड़ जाओ ऐ पंछियो जब पंख तुम्हारे साथ।

अलबत्ता राष्ट्र के प्रति कृतज्ञ एक नागरिक यही कहेगा,

‘फ़ल खाए इस वृक्ष के गंदे कीन्हे पात,

यही हमारा धर्म है, जल मरें इसी के साथ।’

Dr. Rajesh Chauhan

इसी जज्बे के साथ यूक्रेन के बहादुर लोग अपराजेय शत्रु के सामने डटे हुए हैं। यूक्रेन के लिए रूस को हरा पाना तो दूर ज्यादा समय टिक पाना भी मुश्किल है, किन्तु बिना लड़े हार मान लेना कायरता है। जब सवाल वतन के वजूद का हो और खून न खौले तो फिर वह शोणित नहीं नीर है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की को जिस तरह मसखरे के तौर पर प्रचारित किया, वह उसके उलट साहसी राष्ट्रभक्त निकले। जेलेन्स्की ने देश छोड़ कर निकल जाने की पेशकश को न केवल ठुकरा दिया, बल्कि डंके की चोट पर चीन का प्रतिकार किया है।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी जिस तरह से आखिरी पलों में देश को छोड़ कर भागे, वह शर्मनाक था। लीबिया का तानाशाह गद्दाफी जिस तरह छिप गया था और पकड़े जाने पर गिड़गिड़ाते हुए जिंदगी की भीख मांगी, यह भी कोई वाजिब नहीं था। अलबत्ता इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन जब आखिरी वक्त में गिरफ्तार हुए उनका हुलिया बिगड़ा हुआ था। बढ़ी हुई दाढ़ी के कारण पहचाने नहीं जा रहे थे। अमेरिकी सैनिकों ने उनसे गन पॉइंट पर पूछा, हु आर यू? आगे से जवाब आया, आई एम सद्दाम… प्रेसिडेंट ऑफ इराक।

न जाने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की का क्या हश्र होगा, लेकिन फिलहाल उनकी राष्ट्रभक्ति और साहस काबिलेतारीफ है। इतना ही नहीं रूस की ताकत के आगे चींटी जैसे देश एस्टोनिया, लात्विया और लिथुआनिया के राष्ट्रपति भी दो टूक बात कर रहे हैं। यह संकटग्रस्त देशों का राष्ट्रवाद है।

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अब हिंदुस्तान के उन लोगों का जिक्र करना भी बेहद लाजमी है, जो राष्ट्रवाद नाम के बाज की बजाय सुविधाओं की चिड़ियों को तरजीह देते हैं। जब राष्ट्रवाद की बात आती है तो वह सवाल खड़े करते हैं और साथ ही कहते हैं हमें राष्ट्रवाद नहीं, अस्पताल चाहिएं, स्कूल चाहिएं सस्ता अनाज चाहिए। सुविधाओं की चिड़िया राष्ट्रवाद के बाज की हिफाजत बिना ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रहती। राष्ट्रवाद और आतंकवाद को फिजूल की बातें बताने वालो बाज आ जाओ। दुनिया का कोई देश राष्ट्रवाद के बिना लंबे समय तक महफूज नहीं रह सकता। दरअसल राष्ट्र देह है तो राष्ट्रवाद किसी भी राष्ट्र की रूह है। रूह के बिना देह किसी भी काम की नहीं। बहरहाल ईश्वर यूक्रेन की रूह को ताकत दें और रूस की रूह को सद्बुद्धि।

डॉ. राजेश चौहान


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