EXCLUSIVE: गायत्री मंत्र में क्या खास शक्ति है ?

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NEWSAGENDA24, NEWS DESK

गायत्री मंत्र में क्या खास शक्ति है ?

इस चित्र से आपको यह तो समझ आ गया होगा की गायत्री मंत्र से शरीर के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कम्पन व असर होता है । चलो सबसे पहले हम समझते है कोई मंत्र काम केसे करता है , वास्तव में मंत्र के सही और सटीक उच्चारण से वह कार्य करता जब हम कोई मंत्र बोलते है वह ध्वनि हमारे शरीर के अलग अलग भाग से उत्पन्न होती है व अलग अलग भाग को प्रभावित करती है ।

उदाहरण के तौर पर जब आप प्रणव यानी कि ॐ का उच्चारण करते है तो वह भी अलग अलग भाग से उत्पन्न हुआ प्रतीत होगा , तो वैसे ही इस चित्र के अनुसार गायत्री मंत्र भी शरीर के अलग अलग बिंदुओ को प्रभावित करता है । दूसरी बात गायत्री मंत्र क्या है , यह जानना जरूरी है , यह वास्तव में सविता देवता का मंत्र है , मतलब इसकी ऊर्जा का संबंध सविता देवता से है , सविता देवता को ही सूर्य समझिए , सूर्य की शक्ति को सविता कहा गया है । तो जो कहते है की गायत्री मंत्र से कोई असर नहीं हुआ या ना कुछ खास महसूस हुआ तो उन्हें ये जान ना जरूरी है कि इसका जप कब और केसे करे ।

गायत्री मंत्र का जप दिन में होने वाली तीनों में से किसी भी संध्या के समय किया का सकता है , मतलब सवेरे , दोपहर या शाम को , वैसे तो आप दिन में कभी भी जप कर सकते है पर तब सूर्य का प्रकाश होना चाहिए और वह प्रकाश आपके शरीर को स्पर्श भी कर रहा हो , पर आपको रोज एक ही समय एक निश्चित मात्रा में जप करना चाहिए , इस लिए संध्या काल उचित होगा क्युकी तब तो आपको सूर्य का प्रकाश देख कर भी जप शुरू करने का स्मरण हो जाएगा ।

और एक बात गायत्री मंत्र के प्रभाव से मनुष्य , काम , क्रोध , मद , दंभ , दुर्भाव , लोभ , द्वेष , अहंकार से दूर हो सकता है । और इनसे दूर होने पर ही आध्यात्मिक उन्नति संभव है , तो जो अपनी आध्यात्मिक उन्नति चाहते है वे इसका जप अवश्य करे । आपको यह भी पता होगा कि गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र को हिन्दू धर्म में बहुत प्रभाव शाली माना गया है , ऐसा इसीलिए है क्युकी यह दोनों मंत्र आपकी आध्यात्मिक उन्नति में बहुत बड़े सहायक सिद्ध होते है । राम और रावण में भी यही अंतर था , रावण बहुत शक्तिशाली होने साथ ही अहंकारी भी था क्युकी वह गायत्री मंत्र का जप नहीं करता था तो वह अपने अहंकार पर विजय नहीं पा सका , जबकि श्री राम गायत्री मंत्र के जप के प्रभाव को जानकर उसका जाप करते थे और सरल स्वभाव के स्वामी थे


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