ये खाद किसान भाइयों के लिए बहुत जरूरी है! जानिए क्या है इसकी खासियत?

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NEWSAGENDA24, KISAN DESK

अगर आप अपनी जमीन की पैदावार बढ़ाना चाहते है तो कृषि विभाग ने आपके लिए खास प्लान तैयार किया है। दरअसल भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए कृषि विभाग की ओर से ढेंचा नाम की एक फसल को किसानों में बांटा जाएगा। बताया जा रहा है कि अलग-अलग जिलों में करीब 35000 क्विंटल बीज किसानों को दिया जाएगा। ये बीज किसानों को एचएसआइडीसी के सेल काउंटर से ढेंचे का बीच उपलब्ध हो सकेगा।

आपको बता दें कि ये बीज 80 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध होगा। एक किसान को 10 एकड़ तक का बीज मिल सकेगा। जोकि फसल को ताकत देने का काम करेगा। गेहूं की कटाई के बाद खाली खेतों में किसान इसकी बिजाई कर सकते है। वहीं धान की फसल की रोपाई से पहले खेत में इसकी जुताई करने से हरी खाद की आपूर्ति हो सकेगी। जमीन में पौषक तत्वों की कमी हो देखते हुए कृषि विशेषज्ञ हरी खाद के इस्तेमाल पर विशेष रूप से जोर दे रहे हैं।

दरअसल रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से जहां लगातार मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। उर्वरता शक्ति के कम होने के कारण फसलों के उत्पादन पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। जबकि ढैंचा 16 पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए पर्याप्त है। हरी खाद के प्रयोग से ना केवल अच्छी पैदावार मिलती है बल्कि रासायनिक उर्वरकों का खर्चा भी कम किया जा सकता है।

किस जिले में कितना वितरित होगा

अंबाला 1200 क्विंटल

भिवानी 1000

चरखी दादरी 500

फरीदाबाद 300

फतेहाबाद 3500

गुरुग्राम 600

हिसार 1600

झज्जर 1200

जींद 2500

कैथल 1500

करनाल 2200

कुरुक्षेत्र 2400

नूह 600

महेंद्रगढ़ 300

पलवल 1200

पंचकुला 300

पानीपत 2200

रेवाड़ी 2200

रोहतक 2500

सिरसा 2600

सोनीपत 3000

यमुनानगर 1600 क्विंटल

वहीं एक एकड़ में ढैचा की फसल बोने के लगभग 55 दिनों बाद इसकी जुताई करने से 25 से 30 टन हरी खाद तैयार होती है। इसके साथ ही 80 से 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 12 से 15 किलोग्राम फास्फोरस, 08 से 10 किलोग्राम पोटाश की आपूर्ति होती है। जबकि बंजर व उर्वरा खो चुकी भूमि के लिए भी यह वरदान साबित होता है।

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ढैंचा कार्बनिक अम्ल पैदा करती है, जो लवणीय और क्षारीय भूमि को भी उपजाऊ बना देती है। ढैंचा की विकसित जड़े मिट्टी में वायु का संचार बढ़ाती है। मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव इसे खाद्य पदार्थ के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है। ढैंचा की खेती 15 अप्रैल के बाद की जाती है। एक हेक्टेयर में महज 15 से 20 किलोग्राम ढैंचा के बीज की आवश्यकता होती है।


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