क्यों मनाई जाती है कजरी तीज, जानिए इसका महत्व और इससे जुड़ी मान्यता

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(Kajari Teej 2021) पति की लंबी उम्र के लिए कजरी तीज का पर्व महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. आपको बता दें कि कजरी तीज को बूढ़ी तीज भी कहा जाता है. इसके अलावा साल में तीन बार तीज का त्योहार मनाया जाता है. हरियाली तीज, कजरी तीज और हरितालिका तीज. इस साल की कजरी तीज 6 अगस्त को पड़ रही है. पांच अगस्त को रात 10:50 मिनट पर तृतीया तिथि शुरू होगी जो सात अगस्त की रात 12:14 तक रहेगी.

प्राचीन काल से ही कजरी तीज का एक अलग ही महत्व है, इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सलमती के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. कहा जाता है कि जो महिलाएं कजरी तीन के दिन निर्जला व्रत रखती हैं, भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से उनके सुहाग को लम्बी उम्र और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसी तरह यह भी मान्यता है कि अगर यह व्रत कुवांरी कन्याएं रखती हैं, तो उन्हें शादी के योग के साथ मनचाहे वर का वरदान भी मिलता है. इस व्रत में नीमड़ी माता की पूजा की जाती है. साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस व्रत को पूरा माना जाता है.

यह पर्व भारत के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के कई क्षेत्रों में रखा जाता है. मान्यताओं के मुताबिक कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से मनोकामना जरूर पूर्ण होती है. इसी के साथ यह दिन ख़ुशी और उल्लास के लिए भी जाना जाता है. माना जाता है कि इस व्रत को रखने से पारिवारिक सुखों में बढ़ोतरी होती है.

इस व्रत में नीमड़ी माता की पूजा की जाती है. साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस व्रत को पूरा माना जाता है. नीमड़ी माता को भोग में गेंहू, चावल, चना, घी और मेवों से बना प्रसाद चढ़ाया जाता है.


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