करियर: इंश्योरेंस, बैंक और फाइनेंशियल कंपनियों में लोगों की बढ़ी डिमांड, एक्चुरियल साइंस या बीमा विज्ञान में बनाएं अपना सुनहरा भविष्य

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अभय त्रिपाठी

उंगलियों के जोड़ में करियर के सुनहरे अवसर

रूचि के हिसाब से करियर का चुनाव करना भविष्य संवारने की सबसे बड़ी योजना है। आज के दौर में युवाओं के पास करियर के अनेक विकल्प हैं, लेकिन सफलता उन्हीं क्षेत्रों में मिलती है, जिसमें आपकी रूचि होती है। इसलिए करियर का चुनाव अपनी पसंद से ही करना चाहिए। अगर गणित विषय पर आपकी अच्छी पकड़ है और बड़े से बड़ा जोड़ उंगलियों पर हल कर लेते हैं तो एक्चुरियल साइंस आपके करियर के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। इन दिनों इंश्योरेंस, बैंक और फाइनेंशियल कंपनियों में एक्चुरियल पेशेवर लोगों की बहुत मांग है। जानकारों के मुताबिक, आने वाले सालों में बड़े पैमाने में इनकी जरूरत होगी।

एक्चुरियल साइंस क्या है

एक्चुरियल साइंस को बीमा विज्ञान कहा जाता है। विज्ञान की यह शाखा पूरी तरह गणना पर आधारित है।  जो आने वाले समय में आज के मूल्य का अनुमान लगाकर उसके उस समय के मूल्य का आकलन करता है।  इसमें निश्चित समय में आने वाले जोखिम और प्रीमियम पर विशेष ध्यान दिया जाता है। गणित के जो महारथी इस काम को करते हैं उन्हें बीमा क्षेत्र में रीढ़ की हड्डी के नाम से भी जाना जाता है।

बदलती सोच

समय के साथ-साथ लोगों की जीवन शैली और उनकी सोच में परिवर्तन होता ही है। आज लोग अपने धन का उपयोग जीवन को सुरक्षित रखने के लिए तो कर ही रहे हैं, साथ ही साथ वे यह भी चाहते हैं कि उन्होंने जो धन इस काम में लगाया है, उसका अधिक से अधिक लाभ भी हासिल हो। बीमा के क्षेत्र में लगाई जा रही रकम में साल दर साल हो रहा इजाफा और बीमा धारकों की बढ़ती संख्या लोगों की इसी सोच का ही परिणाम है। लोगों की मानसिकता में आए इस परिवर्तन ने एक्चुरियल साइंस को ऐसे क्षेत्र में परिवर्तित कर दिया है, जहां रोजगार की कमी नहीं है।

किसके लिए है यह क्षेत्र

यह क्षेत्र उन लोगों के लिए है जो विश्वव्यापी आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखते हुए कई वर्षो बाद आने वाले आर्थिक परिदृश्य का अनुमान लगा सकते हैं और शेयर मार्केट, विभिन्न कंपनियों की पॉलिसी प्लान आदि के बारे में जानकारी हासिल करने का रूचि रखते हैं। इसके साथ ही जो लोग गणित में महारथ रखते हैं और पूछे जाने वाले किसी भी प्रश्न का उत्तर देने से पूर्व उसकी तह तक जाने का प्रयास करते हैं। वे इस फील्ड के महारथी बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्चुरियल साइंस के क्षेत्र में व्यावहारिक अर्थशास्त्र की जानकारी रखने वालों को कहीं अधिक लाभ होता है।

कोर्स

एक्चुरियल साइंस में कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं, इसलिए कोर्स के चयन में सावधानी आवश्यक है। करियर शुरूआत करने के लिए इस क्षेत्र में कम समयावधि और लंबी समयावधि का कोर्स कराया जा रहा है। एक्चुरियल साइंस में स्नातक भी किया जा सकता है। इसकी समयावधि 3 साल है। इस विषय में बीएससी करने के बाद छात्र अगर चाहें तो एम.एससी. भी कर सकते हैं। मास्टर डिग्री कोर्स दो वर्ष का है। डिप्लोमा कोर्सो में पीजी डिप्लोमा इन इंश्योरेंस साइंस एक वर्ष का है, वहीं पीजी डिप्लोमा इन सर्टिफाइड रिस्क ऐंड इंश्योरेंस मैनेजमेंट को करने के लिए दो से तीन वर्ष का समय चाहिए। पीजी डिप्लोमा कोर्सों की अवधि संस्थानों एवं कोर्सो के आधार पर अलग-अलग है।

  • पीजी डिप्लोमा इन सर्टिफाइड रिस्क ऐंड इंश्योरेंस मैनेजमेंट (दो/तीन वर्ष)
  • सर्टिफिकेट कोर्स इन इंटरमिडियरिज (इंश्योरेंस विषय) (तीन माह)
  • कोर्स ऑफ इंश्योरेंस एजेंट (100-150 घंटे)
  • कोर्स ऑफ इंश्योरेंस मैनेजर (दो वर्ष)
  • पीजी डिप्लोमा इन इंश्योरेंस साइंस (एक वर्ष)
  • पीजी डिप्लोमा इन इंश्योरेंस ऐंड फाइनेंशियल सर्विस (15 माह)
  • मास्टर इन इंश्योरेंस बिजनेस (दो वर्ष)
  • एमएससी इन एक्चुरिअल साइंस (दो वर्ष)
  • फाउंडेशन इन फाइनेंशियल प्लानिंग

शैक्षिक योग्यता

इस क्षेत्र  से जुड़ने के लिए इससे संबंधित कोर्स करना होगा। एक्चुरियल साइंस का कोर्स करने के लिए गणित विषय में 85 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास होना जरूरी है। इन कोर्सो के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष निर्धारित है। जबकि पीजी डिप्लोमा, मास्टर्स डिग्री और सर्टिफिकेट कोर्स के लिए गणित, सांख्यिकी और अर्थशास्त्र विषय से स्नातक की डिग्री जरूरी है।

संभावनाएं

अब एक्चुरियल साइंस के जानकारों के लिए रोजगार मिलना मुश्किल नहीं है। इस क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन काम के नए विकल्प सामने आ रहे हैं। इन दिनों नौकरियों के लिए कई रास्ते खुल गए हैं। इंश्योरेंस, बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां इन्हें हाथों-हाथ ले रही हैं। दूसरी तरफ, बीपीओ कंपनी में भी जोखिम के बारे में विश्लेषण करने के लिए बड़े पैमाने पर एक्चुरियल प्रोफेशनल्स की बहाली हो रही है। बीपीओ में काम करने वाले एक्चुरी पेशेवर का वेतन भी आम बीपीओ कर्मचारियों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक होती है। भारत में संभावनाएं इसलिए भी अधिक हैं, क्योंकि वैश्विक ग्राहकों को कम संसाधन और न्यूनतम लागत में अच्छी सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। वैसे, आज एक्चुरियल प्रोफेशनल्स की मांग सरकारी और प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों में ही नहीं,  बल्कि टेरीफ एडवाइजरी कमिटी,  इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलॅपमेंट अथॉरिटी (आईआरडीए),  सोशल सिक्योरिटी स्कीम,  फाइनेंशियल एनालिसिस फर्म में भी रोजगार के तमाम अवसर हैं। कहने का आशय यह है कि यदि आप बेहतर काम करते हैं और अनुभव है, तो इस क्षेत्र में आपके लिए बेहतर अवसर हैं।

विदेश में भी अवसर

कई ऐसी विदेशी कंपनियां हैं, जो इस क्षेत्र में निपुणता हासिल करने वाले लोगों को भारत में स्थित अपने कार्यालयों में नियुक्त करती हैं। जिन लोगों को ऐसी कंपनियों में काम करने का अवसर मिलता है, वे अगर अधिकारियों को अपने काम से संतुष्ट कर देते हैं तो उन्हें विदेश जाकर काम करने के अवसर आसानी से मिल जाते हैं। इस क्षेत्र की वृद्धि को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले एक या दो वर्षो में ही इसके जानकारों के लिए विदेश में काम करने के और भी व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।

सैलरी

इस क्षेत्र में काम की शुरुआत करने वाले लोगों को अच्छा वेतन भी मिलता है। इसमें शुरूआती आय 10 से 15 हजार रुपये के आसपास होती है। यदि आपके पास इस क्षेत्र में कार्य करने का आठ से 10 साल का कार्य अनुभव है, तो आप पैसों की बारिश करा सकते हैं।

कहां से करें कोर्स

  • डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमनिटीज ऐंड सोशल साइंस, आईआईटी, मुंबई
  • कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़
  • बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
  • यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे, पुणे
  • यूनिवर्सिटी ऑफ कल्याणी, पश्चिम बंगाल
  • एमिटी स्कूल ऑफ इंश्योरेंस ऐंड एक्चुरिअल साइंस, नोएडा

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