कट्टर मुसलमानों से क्यों आती है मुगलई बू? डॉक्टर राजेश चौहान का ये लेख जरुर पढ़िए।

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भारत के कट्टर मुसलमानों से अभी भी मुगलई बू आती है। वो मुगलों की लूट, अत्याचार और जनसंहार को झुठलाने के लिए कुतर्क गढ़ने से बाज नहीं आते। सारी दुनिया जानती है और इतिहास चीख-चीख कर कहता है कि मुगलों ने कैसे हमारी धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं के साथ-साथ मानवीय अस्मिता को कितनी बेरहमी से कुचला है। यूक्रेन के राजदूत ने इस बात का जिक्र क्या किया, कुछ मुग़लपरस्तों को पतंगे लग गए। औरंगजेब के अनुयायी तिलमिला उठे। ये होता जा चोर की दाढ़ी का तिनका। उंगली मुगलों पर उठी और पेट मे मरोड़ इनके उठी। दरअसल यूक्रेनी राजदूत इतिहास का तुलनात्मक उद्वरण रखा था।

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”रूस का हमला, मुग़लों ने राजपूतों का जिस तरह से जनसंहार किया था, वैसा ही है. मैं दुनिया के सभी प्रभावी नेताओं से अपील करता हूँ कि पुतिन के ख़िलाफ़ सभी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए, हमला रोकें. मैं मोदी जी से भी अपील करता हूं”। इस तुलना से ओवैसी तिलमिला गए। उन्होंने जो कहा वह देखिए।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ”मान्यवर भारत के मध्यकालीन इतिहास का आधा-अधूरा ज्ञान अपने पास ही रखें. इसमें इस्लामोफ़ोबिया की बू आती है. जो चल है, उसे ग़लत तरीक़े से पेश मत कीजिए. मैं हैरान हूँ कि नरेंद्र मोदी का ध्यान ख़ींचने के लिए उन्हें मुग़लों के इस्तेमाल का आइडिया कहाँ से आया?”

ओवैसी यूक्रेनीर राजदूत की टिप्पणी को इस्लामोफोबिया बताते हैं, लेकिन खुद मोदी फोबिया से घिरे हुए नजर आते हैं। दरअसल इन कट्टरपंथियों में अभी भी मुगलई बू बाकी है। तभी यह मुगलों के पैरोकार बन कर खड़े होते हैं। समाज को औरंगजेब के इन अनुयायियों को अच्छे से पहचान लेना चाहिए।

डॉक्टर राजेश चौहान

ये लेखक के निजी विचार हैं।


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