क्या होता है वर्टिगो अटैक? महिलाएं रहें ज्यादा सतर्क

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बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरूचा की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब कर रही थी लेकिन बावजूद इसके वो लगातार काम कर रही थीं। इसके कारण हाल ही में उन्हें वर्टिगो अटैक आया, जिसके कारण उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा। रिसर्च के अनुसार, करीब 70% भारतीय महिलाओं को यह अटैक पड़ता है लेकिन बिजी शेड्यूल के चलते वो इसे नजरअंदाज कर देती हैं। चलिए आपको बताते हैं कि क्या होता है वर्टिगो अटैक और इससे कैसे निपटा जाए।

क्या होता है वर्टिगो अटैक?

डॉक्टर्स के मुताबिक, नुसरत को वर्टिगो अटैक हुआ है, जिसका सबसे बड़ा कारण तनाव होता है। वर्टिगो का अर्थ है, घूमना या चक्कर आना। इसके कारण जहां कुछ लोगों को चक्कर आते हैं तो वहीं कुछ मस्तिष्क में पीड़ा अनुभव करते हैं। आंखो के सामने अंधेरा छा जाता है और लगता है मानो सारी धरती घूम रही हो।

क्यों आता है वर्टिगो अटैक?

यह समस्या तब होती है जब व्यक्ति को कान, मस्तिष्क व तंत्रिका मार्ग में कोई बाधा रहती है। मेडिकल भाषा में इसे एक्रोफोबिया भा कहा जाता है।  डॉक्टरों के अनुसार, वर्टिगो अटैक लंबे समय तक रहता व थोड़ी देर भी रह सकता है।

किन लोगों को अधिक खतरा?

  • यह समस्या ज्यादातर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगो में देखने को मिलती है लेकिन तनावभरी जिंदगी के कारण लोग कम उम्र में भी इसका शिकार हो रहे हैं। रिसर्च की मानें तो 15 %से 40 % लोग किसी भी क्षण वर्टिगो और डिजिनेस से पीड़ित होते है, जिसमें 70% संख्या महिलाओं की होती है। – इसके अलावा खून की कमी (एनीमिया) या दिमाग से जुड़ी बीमारी से ग्रस्त लोगों को वर्टिगो अधिक प्रभावित करता है।

वर्टिगो के कारण क्या है?

. कान की शिराओ में कैल्शियम कार्बोनेट का कचरा जमा होना . कान के भीतर संक्रमण . मेनियार्स रोग के कारण . वेस्टीब्यूलर माइग्रेन . लेब्रिथीनाइटिस

वर्टिगो अटैक के लक्षण

. अधिक आवाज आने से सिरदर्द . चक्कर आना . अधिक पसीना आना . जी मचलना, उल्टी होना . बहुत अधिक कमजोरी महसूस होना . अस्थिर या असंतुलित महसूस होना . कम सुनाई देना या कान से सीटी जैसी आवाज आना . गिरने का एहसास होना

वर्टिगो का इलाज क्या है?

-सामान्य वर्टिगो इलाज में इलाज की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि रोगी खुद ब खुद ठीक हो जाता है। इस दौरान मरीज को आराम करने की सलाह दी जाती है। हालांकि अगर स्थिति गंभीर हो तो डॉक्टर कुछ एंटीबायोटिक दवाइयां देते हैं। -सिकनेस, जी मिचलाने व सिरदर्द के लिए डॉक्टर एंटी-इमिटिक्स या एंटी-हिस्टामाइन जैसे दवाएं देते हैं। -तनाव के कारण चक्कर आने की स्थिति में मरीज को चिकिस्तक मनोचिकित्सा थेरेपी दी जाती है।

इसके अलावा आप कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से इस समस्या को दूर कर सकते हैं..

  1. दो-तीन बूंद पेपरमिंट ऑयलमें एक चम्मच बादाम तेल मिलाकर माथे पर और गर्दन के पीछे मसाज करें। 2. अदरक के तेल से गर्दन, कानों के पीछे और तलवों पर मसाज करने से भी आराम मिलेगा। 3. दो से तीन बूंद ग्रेपफ्रूट ऑयल में डीफ्युजर डालकर कमरे के किसी कोने में रख दें। इसकी खुशबू से मन शांत होगा और आपको यह समस्या नहीं होगी। 4. दो से तीन बूंदें तुलसी के तेल  में एक बूंद साइप्रस का तेल मिलाकर कमरे में रखें। 5. लोबान तेल से कंधों की मसाज करने पर भी वर्टिगो की समस्या दूर रहेगी। साथ ही इससे तनाव भी कम होगा।

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