विधानसभा चुनाव के बाद आपको बड़ा झटका देने की तैयारी में सरकार!

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NEWSAGENDA24,  BUSINESS DESK

विधानसभा चुनावों के बाद आम आदमी (aam aadmi) को बड़ा झटका लगने के संकेत अभी से नजर आ रहे है। दरअसल उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत 5 राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव (assembly elections) के बाद कभी भी ये झटका लग सकता है। आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव के नतीजे (elections result) 10 मार्च को आने हैं, इसके बाद पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) महंगे हो सकते हैं, क्योंकि कच्चे तेल (crude oil) के दाम 8 साल के हाई लेवल पर जा पहुंचे हैं। आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार (international market) में कच्चे तेल के दाम 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे पहले साल 2014 में कच्चे तेल (crude oil) के दाम 95 डॉलर के पार गए थे।

एक दिसंबर 2021 को कच्चे तेल (crude oil) का दाम 69 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। यानि ढाई महीने के भीतर कच्चे तेल (crude oil) के दामों में 37% की तेजी आ चुकी है। बताया जा रहा है कि जल्द ही ये 100 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) की कीमतों में 15 रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

वहीं एक अनुमान ये भी है कि अगर पुतिन (putin) हमला करते हैं, तो कच्चे तेल (crude oil) की कीमतें 100 डॉलर से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, लेकिन अगर बाइडेन (biden) ईरान पर से प्रतिबंध हटाते हैं, तो इनमें 10 डॉलर की गिरावट होगी। फिलहाल मार्केट में जितनी मांग है उतनी आपूर्ति नहीं है, इस वजह से ये तो तय है कि कीमतें 100 डॉलर के पार जाएंगी।

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एक्सपर्ट्स के अनुसार सरकार भले ही पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) की कीमत निर्धारित करने में अपनी भूमिका से इनकार करती हो, लेकिन बीते सालों में ऐसा देखा गया है कि चुनाव के दौरान सरकार जनता को खुश करने के लिए पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) के दाम नहीं बढ़ाती है। पिछले सालों का ट्रेंड (trend) बता रहा है कि चुनावी मौसम में जनता को पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) की बढ़ी कीमतों से राहत मिली है।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने की घोषणा की थी। अगले ही दिन देशभर में पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) की कीमतों में कमी आई और कई राज्यों ने भी पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) पर टैक्स कम किया। इससे आम आदमी को राहत मिली थी। इसके बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं। रुझान बताते हैं कि पिछले करीब साढ़े तीन महीने से देश में पेट्रोल और डीजल (petrol-diesel) की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी आई है।

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जानकारी के लिए आपको बता दें कि जून 2010 तक सरकार पेट्रोल (petrol-diesel) की कीमत निर्धारित करती थी और हर 15 दिन में इसे बदला जाता था। 26 जून 2010 के बाद सरकार ने पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण ऑयल के ऊपर छोड़ दिया। इसी तरह अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमत भी सरकार निर्धारित करती थी, लेकिन 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने ये काम भी ऑयल कंपनियों को सौंप दिया। अभी ऑयल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करती हैं।

 


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