मेरे राम- रोहित चौहान की शानदार कविता

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NEWSAGENDA24, मेरा ब्लॉग

किसी की आस हैं किसी की श्वास मेरे राम।

किसी की आन, बान, शान हैं हमारे राम।।

किसी के लिए ये ज़मीं वो आसमान राम।

किसी के लिए सारा संसार मेरे राम।।

मन में हैं किसी की गोद में समाये राम।

गोद में लिए हुये संसार मेरे राम।।

मेरा ब्लॉग: चला गया सिनेमा का आईना।

जिसने नहीं चाहा सपना बन गये मेरे राम।

किसी के रोज़ सपनों में आते हैं मेरे राम।।

पत्थर में ढूँढ़ते रहे कहां मिलें मेरे राम।

मन से मनाया, मन के मुताबिक़ चले मेरे राम।।

संसार के सरकार झोपड़ी में रहे राम।

जब जीत गए भक्त, जीत गये मेरे राम।।

महलों से ना रिझाओ खुद खजाना मेरे राम।

कण-कण में बूंद बूंद, सांस-सांस मेरे राम।।

फल-फल में फूल-फूल, डाली-डाली मेरे राम।

फूलों की खुशबू, गेहूं की बाली मेरे राम।।

जेठ की तपिश, सावन की झड़ी मेरे राम।

ठिठुरन समेटे मौसम की बहार मेरे राम।।

सुबह, दोपहर की शाम रात मेरे राम।

सूरज भी सोने जाए जब बोलें मेरे राम।।

बैल के कंधे के हल-जुआ मेरे राम।

बछड़े का दूध, गाय का रंभाना मेरे राम।।

रंग भरी दुनिया के रंग मेरे राम।

पानी की निर्मलता आर-पार मेरे राम।।

अत्याचारी के खिलाफ युद्ध, शांति मेरे राम।

युद्ध का आरंभ और विराम मेरे राम।।

सृष्टि की शुरुआत और अंत मेरे राम।

बीच में हैं हम तो बोलो जय सिया राम।।


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