रहस्य: वो सालों से नहीं निकले घर से बाहर, मेजर पिता और बेटी के बारे में बेटे ने खोले राज

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NEWSAGENDA24, NEWS DESK

चंडीगढ़ सेक्टर-36 के मकान या उसे भूतिया बंगला भी कह सकते है। ये मकान पिछले कई सालों से रहस्य बना हुआ था। लेकिन अब इसके राज खुल गए है। दरअसल तीस साल से खुद को अपने ही घर में कैद हो गए मेजर हरचरण सिंह चड्ढा और उनकी बेटी जीवजोत को रेस्क्यू कर लिया गया है। अब दोनों को चंडीगढ़ के जीएमसीएच-32 में भर्ती किया गया हैं।

वहीं मेजर चड्ढा के बेटे सर्वप्रीत चड्ढा ने इस मामले में कई राज खोले हैं। हालांकि सर्वप्रीत पिता से अलग पंचकूला में रहता है। करीब 30 साल से वो पिता से अलग रह रहा था, क्योंकि पिता के सख्त लहजे के चलते उसने घर छोड़ दिया था। जिस दिन मेजर चड्ढा और उसकी बेटी को रेस्क्यू किया गया उस दिन सर्वप्रीत को भी मौके पर बुलाया गया था।

वहीं जीएमसीएच-32 के डाक्टरों ने बताया कि 94 साल के मेजर हरचरण सिंह और 58 साल की उनकी बेटी जीवजोत चड्ढा मानसिक रूप से ठीक हैं, लेकिन शारीरिक रूप से कमजोर हैं। शारीरिक रूप से कमजोर होने के चलते उनकी देखभाल गवर्नमेंट मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल सेक्टर-32 के मनोवैज्ञानिक विभाग में की जा रही है।

बताया गया है कि मेजर हरचरण सिंह चड्ढा और उनकी बेटी सालों से बंद मकान में रह रहे थे। मकान का बाहरी हिस्सा जंगल जैसा लगता है, क्योंकि घर के चारों तरफ झाड़ियां उग चुकी हैं, जिससे ये घर किसी भूतिया बंगले से कम नहीं लगता, घर में बिजली का कनेक्शन तक नहीं है, जिससे रात में भी अंधेरा और सन्नाटा रहता है। वहीं घर के अंदर कबाड़ के ढेर लगे हुए थे। पिता और बेटी कभी घर से बाहर नहीं आते थे जिसके चलते स्थानीय लोग परेशान थे।

मेजर हरचरण सिंह चड्ढा और उनकी बेटी जीवजोत चड्ढा ने वर्ष 2003 से ही खुद को घर कैद कर लिया था। जिस समय वह घर में बंद हुए तो उनके साथ मेजर की पत्नी भी थी। अचानक तीन लोगों ने खुद को घर के अंदर बंद कर लिया और जरूरत का सामान लेने के लिए कभी-कभार बेटी जीवजोत ही बाहर आती थी।

घर की खस्ता हालत को देखते हुए रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के तत्कालीन सचिव आरसी गोयल ने एसडीएम अर्जुन सिंह को जुलाई 2015 में भी शिकायत दी थी। शिकायत के बाद बेटी जीवजोत ने एसडीएम के समक्ष पेश होकर कहा था कि घर को खुद संभाल रही है और घर की सफाई भी कराई थी। एक बार सफाई होने के बाद स्थिति पहले से भी भयानक हो गई, जिसे देखते हुए एक बार फिर से स्थानीय लोगों ने एसडीएम कार्यालय में चार अगस्त 2021 को शिकायत दी थी। शिकायत के बाद कार्रवाई करते 24 फरवरी को पिता और बेटी को रेस्क्यू करके उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है।

अगस्त 2021 को शिकायत के बाद 30 जनवरी 2022 को सोशल वेलफेयर विभाग की एल्डर हेल्पलाइन ने घर में विजिट की थी और रिपोर्ट में बताया था कि घर की स्थिति बेहद खराब है। घर में रहने वाले लोगों की मदद के लिए उन्हें रेस्क्यू करना होगा। सोशल वेलफेयर की टीम द्वारा विजिट करने के बाद मेजर चड्ढा का बेटा सर्वप्रीत (सेवी) चड्ढा सामने आया। सर्वप्रीत ने पब्लिक विंडो से लेकर एसडीएम कार्यालय सेक्टर-42 में अपील की थी कि उनके पिता और बहन मानसिक रूप से बीमार हैं, जिन्हें घर से बाहर निकालने में मदद की जाए। बेटे की शिकायत और 22 फरवरी को दैनिक जागरण की खबर के बाद 23 फरवरी को रेस्क्यू टीम बनाई गई जिसका नोडल आफिसर स्थानीय एसएचओ जसपाल सिंह को बनाया गया। इसके बाद टीम ने दोनों बाप-बेटी को घर से रेस्क्यू किया था।

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पुलिस को दिए बयान में मेजर चड्ढा के बेटे सर्वप्रीत चड्ढा ने बताया कि 31 जनवरी 2018 को मां के देहांत होने पर बहन ने सुबह चार बजे एंबुलेंस को कॉल की थी। पड़ोसियों को बिना बताए जीवजोत ने मां को श्मशानघाट सेक्टर-25 पहुंचा दिया था। श्मशानघाट पर पहुंचने के बाद वहां पर पंडित ने मां का अंतिम संस्कार के लिए बेटे की बुलाने के लिए कहा। इस पर एंबुलेंस चालक ने फोन करके सर्वप्रीत को बुलाया था, तब जाकर उसे पता चला कि मां की मौत हो गई  है। अंतिम संस्कार होने के बाद सेक्टर-34 के गुरुद्वारे में सर्वप्रीत ने ही अपनी मां का अंतिम अरदास और बाकि दूसरी रस्में पूरी की थी।


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