नेहरू का वो फैसला,जो आज हमें आपस में लड़ने के लिए कर रहा है मजबूर ? ये कहानी आपको रूला देगी।

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Newsagenda24, News desk

क्या आप जानते हैं कि इंडस वॉटर ट्रीटी क्या है इस समझौते से भारत को कितना बड़ा नुकसान हुआ है और आज भी हम इस नुकसान को इस कदर भुगत रहे हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ी भी इसकी भुक्तभोगी हो सकती है।अगर आज हमने कोई फैसला नहीं लिया तो यह समस्या जो भारत के लिए नासूर बन चुकी है यह कहीं ज्यादा और खतरनाक होने वाली है।

आपको बता दें कि यह समझौता 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था इस समझौते में भारत से गुजरने वाली 6 नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था इस बंटवारे में कितना बड़ा खेल किया गया इसके बारे में जानकर आप चौक जायेंगे आपको बता दें कि वर्ल्ड बैंक ने भारत और पाकिस्तान के बीच जो समझौता करवाया उसमें बहुत बड़ा खेल किया गया था।

दरअसल 6 नदियां जो भारत से पाकिस्तान की ओर जाती है उनमें ऊपर की 3 नदियों का पानी पाकिस्तान को दिया गया और नीचे की तीन नदियों का पानी भारत को दिया गया कहने में और सुनने में तो यह बात बिल्कुल ठीक है कि पानी का बंटवारा आधा-आधा हो गया।

लेकिन आपको बता दें कि ऊपर की जो 3 नदियां हैं उनमें 80 एमएएफ पानी है लेकिन जो नीचे की 3 नदियां हैं उनमें सिर्फ 25 से 30 एमएएफ पानी है यानी कि पाकिस्तान को 2.5 गुना पानी ज्यादा दिया गया इसके अलावा इस समझौते में जो सबसे बड़ा कांड तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारतीयों के साथ करवाया उसे सुनकर आप चौक जायेंगे।

दरअसल इस समझौते के साथ-साथ पाकिस्तान को आने वाले 10 साल तक सोना भी दिया जाना था जिससे वहां पर पाकिस्तान में नहरें बननी थीं… लेकिन नहरें बनाने की बजाय पाकिस्तान ने उस पैसे का इस्तेमाल भारत के खिलाफ 1965 के युद्ध में किया। युद्ध से भारत को नुकसान तो हुआ ही लेकिन ना तो इस युद्ध के बाद इस समझौते को तोड़ा गया बल्कि लगातार पाकिस्तान को पैसा दिया जाता रहा।

इतना ही नहीं 1960 से 70 के बीच में पहले 4 साल जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री रहे उसके बाद लाल बहादुर शास्त्री रहे उसके बाद इंदिरा गांधी रहीं लेकिन किसी ने भी इस समझौते को नहीं तोड़ा…. फिर 1971 का युद्ध हुआ लेकिन उसके बाद भी इस समझौते को नहीं तोड़ा गया। उसके बाद कारगिल का युद्ध हुआ और हर बार पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी लेकिन बावजूद इसके ये समझौते तोड़ा नहीं गया और तो और पुलवामा हमले के बाद बातें तो बहुत हुइं लेकिन ये समझौता तोड़ा नहीं गया।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार बयान भी दे चुके हैं कि पानी और खून एक साथ नहीं बहेगा बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समझौते को नहीं तोड़ पा रहे हैं, हालांकि अटल बिहारी वाजपेई के समय में एक बहुत शानदार योजना पानी को लेकर बनाई गई थी लेकिन आज तक उस योजना पर अमल नहीं हुआ है।

दरअसल इस योजना का मुख्य उद्देश्य यही था कि जिस भी नदी में पानी कम हो उस नदी में पानी अपने आप चला जाएगा और पूरे देश में नदियों का पानी का बैलेंस बना रहेगा और हर जगह पर पानी पहुंच जाएगा लेकिन आज तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ है उसके अलावा अगर भारत में पानी की कमी को खत्म करना है तो बताया जाता है कि अटल बिहारी वाजपेई के टाइम पर ही शारदा और यमुना से एक लिंक नहर बनाई जानी थी जो आज भी कागजों पर ही घूम रही है इस नहर का पानी शारदा नदी से लेकर यमुना नदी में डाला जाना था और यमुना नदी से एक नहर को निकाला जाना था जो हरियाणा में करनाल जींद हिसार होते हुए राजस्थान की ओर जानी थी यह राजस्थान से आगे गुजरात में भी बनी थी लेकिन अभी तक इस पर कोई काम नहीं हुआ है।

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बताया जाता है कि इस नहर को बनाने के लिए करीब 100000 करोड रुपए की जरूरत है और जिसको लेकर अभी तक बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया मतलब साफ है कि चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस सब एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं वह आम जनता और किसानों की बात को तवज्जो ना करके सिर्फ पानी को लेकर राजनीति करते हैं इसके अलावा इनका कोई मकसद नहीं है।


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