Panchayat चुनाव के लिए अभी करना होगा और भी wait ! High court में कहां फंसा है पेंच?

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NEWSAGENDA24, NEWS DESK

Panchayat चुनाव के लिए हरियाणा की जनता को अभी और भी wait करना पड़ेगा। अनुमान के मुताबिक april  से पहले किसी भी हालत में पंचायतों के चुनाव होते नहीं दिख रहे है। दरअसल reservation के प्रावधान के खिलाफ दायर याचिकाओं पर high court ने सुनवाई 21 मार्च तक टाल दी है। हरियाणा सरकार ने कोर्ट में कहा है कि वो चुनाव करवाना चाहते है, पर high court ने आरक्षण को चुनौती देने वाले पक्ष से जवाब मांग रखा है, जो अभी तक दायर ही नहीं किया गया है।

अगर मान लिया जाए कि 21 मार्च को कोई decision हो भी गया, तब भी अप्रैल से पहले चुनाव किसी भी सूरत में होते नहीं दिख रहे है। ये भी संभव है कि 21 मार्च को सुनवाई के दौरान high court कोई अगली तारीख तय कर दे। ऐसे में पंचायत चुनाव और लंबे खिंचते जा रहे हैं। हरियाणा सरकार के सामने अब पंचायत चुनाव से पहले शहरी निकाय चुनाव कराने के विकल्प के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

हालांकि high court ने याची पक्ष को कहा कि पहले वो इस मामले में अपना जवाब दायर करे, तब मामले की आगे सुनवाई होगी। इस मामले में हरियाणा सरकार ने एक अर्जी दायर कर चुनाव के लिए high court से इजाजत मांग रखी है। हरियाणा सरकार ने दायर अर्जी में कहा है कि पिछले साल 23 फरवरी को ही पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो चुका है, इसलिए जल्द ही चुनाव कराए जाने चाहिए। पंचायती राज एक्ट के दूसरे संशोधन के कुछ प्रावधान को high court में 13 याचिकाएं दायर कर चुनौती दी हुई है।

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पहले कोरोना के कहर के चलते सरकार ने ये चुनाव नहीं करवाने का high court को आश्वासन दिया था। अब हालात बेहतर हो चुके हैं, बावजूद इसके अभी सरकार ने चुनाव को लेकर कोई notification जारी नहीं की है। याचिकाकर्ता ने राज्य के पंचायत विभाग द्वारा 15 अप्रैल को अधिसूचित हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम 2020 को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए रद्द किए जाने की high court से मांग कर रखी है। वहीं हाई कोर्ट को बताया जा चुका है कि इस संशोधन के तहत की गई नोटिफिकेशन के तहत पंचायती राज में आठ प्रतिशत सीटें बीसी-ए वर्ग के लिए आरक्षित की गई है और ये तय किया गया है कि न्यूनतम सीटें दो से कम नहीं होनी चाहिए। याचिकाकर्ता के अनुसार यह दोनों ही एक दूसरे के विपरीत हैं, क्योंकि हरियाणा में आठ प्रतिशत के अनुसार सिर्फ छह जिले हैं, जहां दो सीटें आरक्षण के लिए निकलती हैं। अन्यथा 18 जिलों में सिर्फ एक सीट आरक्षित की जानी है, जबकि सरकार ने 15 अप्रैल की नोटिफिकेशन के जरिए सभी जिलों में बीसी-ए वर्ग के लिए दो सीटें आरक्षित की हैं जो कानूनन गलत हैं।


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