आपके खेत से भी निकलेगा ‘सोना’, बस करना होगा ये काम

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क्या आप यकीन कर सकते हो कि एक हेक्टेयर यानि ढ़ाई एकड़ में 92 क्विंटल गेहूं भी हो सकता है। शायद आपको यकीन नहीं होगा क्योंकि अभी तक तो आपने गेहूं की वो किस्मों देखी होंगी जिससे प्रति हेक्टेयर 60 से 75 क्विंटल तक पैदावार होती रही हैं। इस हिसाब से एक एकड़ में करीब 28 से 30 क्विंटल पैदावार मिलती रही है। लेकिन अब किसानों के भंडार गेहूं से और अधिक भरेगें।

दरअसल हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में पौध प्रजनन विभाग के गेहूं अनुभाग के वैज्ञानिकों ने गेहूं की डब्ल्यूएच 1270 किस्म को इजाद किया है जो देश में दूसरी सबसे अधिक पैदावार देने वाली किस्म है। बताया जा रहा है कि ये किस्म सर्वाधिक 91.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है। जबकि पहले स्थान पर करनाल के भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान की डीबीडब्ल्यू 303 किस्म है जो 97.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है।

ये किस्म पीला रतुआ और भूरा रतुआ, पत्ता अंगमारी, सफेद पत्तियों की कांगियारी रोगों के प्रति रोगरोधी है। इसके साथ ही उच्च तापमान का भी इस किस्म पर कोई असर नहीं पड़ता। इसके लिए एचएयू सरकारी संस्थानों से बीज तैयार करा रहा है ताकि अगले सीजन तक किसानों को बीज उपलब्ध कराया जा सके।वहीं इस किस्म में 12.4 प्रतिशत प्रोटीन, 37.9 पार्ट्स पर मिलियन लौह तत्व और 37.9 पीपीएम जस्ता तत्व पाया जाता है। जबकि आम किस्मों में 30 से 32 पीपीएम तक ही आयरन जस्ता तत्व पाया जाता है। इसके गेहूं के आटे से चपातियां भी मुलायम और खाने में स्वादिष्ट बनती हैं।

वहीं एचएयू के गेहूं वैज्ञानिक ने बताया कि गेहूं की ये किस्म नार्थ वेस्टर्न जोन में उगाने के लिए काफी अच्छी है। इस जोन में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के कोटा और उदयपुर क्षेत्र को छोड़कर, पूर्वी उत्तर प्रदेश के झांसी क्षेत्र को छोड़कर, जम्मू-कश्मीर के कठुआ और जम्मू जिले, हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला और पांवटा घाटी और उत्तराखंड का तराई क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस किस्म की अगेती बिजाई की जाए तो ये काफी फायदेमंद रहेगी औऱ बेहतर उपज मिलेगी।

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गेहूं की डब्ल्यूएच 1270 किस्म को 25 अक्टूबर से पांच नवंबर तक बिजाई के लिए उत्तम माना है। ये किस्म 156 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इसकी औसत ऊंचाई भी 100 सेंटीमीटर तक होती है, जिसके कारण यह खेत में गिरती नहीं। अगेती बिजाई यानी अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बिजाई करने पर इसकी अधिक पैदावार ली जा सकती है। इस किस्म की बिजाई के लिए सिफारिश किए गए उर्वरकों पर गौर करें तो 150 प्रतिशत एनपीके, छह टन गोबर की खाद प्रति एकड़ और वृद्धि नियंत्रकों का प्रयोग किया जाता है।

वहीं हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज कहते है कि विश्वविद्यालय लगातार किसानों को रोगरोधी व अधिक उपज की नई- नई किस्में प्रदान कर रहा है। किसानों से फीडबैक लेकर विज्ञानी नई किस्में विकसित करने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं। इसी कड़ी में गेहूं की डब्ल्यूएच 1270 किस्म को इजाद किया गया है। कृषि वैज्ञानिक लगातार कोशिश कर रहे है किस तरह से किसानों की आय को बढ़ाया जाए, क्योंकि जिस तरह से जमीनें कम हो रही है तो किसानों की आय भी कम हो रही है। लेकिन वैज्ञानिकों का लक्ष्य है कि इस छोटी जोत में भी किसान की पैदावार ज्यादा हो।

 


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