एक थी गौरैया! क्या ये कहना सही होगा ?

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NewsAgenda24, NEWS DESK

विश्व गौरैया दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

नासिक निवासी मोहम्मद दिलावर ने घरेलू गौरैया पक्षियों की सहायता हेतु नेचर फोरेवर सोसाइटी की स्थापना की थी। इनके इस कार्य को देखते हुए टाइम ने 2008 में इन्हें हिरोज ऑफ दी एनवायरमेंट नाम दिया था। विश्व गौरैया दिवस मनाने की योजना भी इन्हीं के कार्यालय में एक सामान्य चर्चा के दौरान बनी थी।

पर्यावरण के संरक्षण और इस कार्य में मदद की सराहना करने हेतु एनएफ़एस ने 20 मार्च 2011 में गुजरात के अहमदाबाद शहर में गौरैया पुरस्कार की शुरुआत की वर्तमान में गौरैया चिड़िया (sparrow bird) की संख्या में लगातार कमी हो रही है. कई देशो में तो इन्हें लुप्त घोषित कर दिया है. ऐसा ही चलता रहा तो इन नन्हे पक्षी का दिख पाना भी मुश्किल हो जाएगा. हम अपनी आने वाली पीढियों को कहेंगे कि, देखो कुछ सालो पहले ऐसा पक्षी हुआ करता था.

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गौरैया चिड़िया की घटती आबादी का क्या कारण हो सकता है? इसका एक ही कारण है कि इंसानों का प्रकृति में हस्तक्षेप बढ़ जाना. बढ़ते रेडिएशन से मासूम नन्हे पक्षियों की निरंतर मौते हो रही है. मोबाइल टावर्स से निकलने वाली रेडिएशन यानी विकिरणों के इन पक्षियों के लिए प्राण घातक है. इन हानिकारक रेडिएशन से इनके प्रजजन करने की क्षमता घट जाति है. और ये दिशाएँ खोज नही पाती जिससे ये भटक जाति है. अंतत इनकी मृत्यु हो जाती स्पैरो बर्ड (गौरैया चिड़िया) को बचाने के उपाय क्या है? sparrow bird को बचाने के लिए कई देश अपने अपने स्तर पर प्रयास कर रहे है. पुरे विश्व में हर साल 20 मार्च को “विश्व गौरैया दिवस” (world sparrow day) मनाया जाता है.

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गौरैया की घटती संख्या को कम करना, लोगो को इसके प्रति जागरूक करना, गौरैया चिड़िया का संरक्षण करना तथा उसे लुप्त होने से बचाना इसका मुख्य उद्देश्य है।


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